दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय, भोपाल में ‘खाकी वर्दी का योद्धा’ पुस्तक का हुआ विमोचन

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने स्वर्गीय विजय रमन के प्रेरणादायी पुलिस सेवा जीवन को किया स्मरण

दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय, भोपाल में आज पब्लिक रिलेशन सोसायटी ऑफ इंडिया, मध्यप्रदेश के तत्वावधान में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी स्वर्गीय विजय रमन के जीवन एवं पुलिस सेवा के अनुभवों पर आधारित पुस्तक ‘खाकी वर्दी का योद्धा’ का विमोचन समारोह पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा की उपस्थिति में आयोजित किया गया।

इस अवसर पर कैलाश मकवाणा ने स्वर्गीय श्री विजय रमन के व्यक्तित्व एवं पुलिस सेवा को स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा, स्पष्टवादिता, नेतृत्व क्षमता और टीम के प्रति सम्मान का प्रेरक उदाहरण रहा है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों का व्यक्तित्व और कार्यशैली आने वाली पीढ़ी के पुलिस अधिकारियों को दिशा देती है और विजय रमन भी अनेक अधिकारियों के लिए मार्गदर्शक एवं प्रेरणास्रोत रहे।

मकवाणा ने कहा कि विजय रमन ने अपने दीर्घ पुलिस सेवा जीवन में अनेक चुनौतीपूर्ण एवं महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। चंबल क्षेत्र में डकैत समस्या के विरुद्ध अभियानों, बस्तर में नक्सल विरोधी अभियानों, जम्मू-कश्मीर में सेवाओं, BSF, विशेष सुरक्षा समूह SPG में चार प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा व्यवस्था तथा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) सहित विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों में उनके अनुभव उनकी बहुआयामी एवं चुनौतीपूर्ण सेवा यात्रा को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि विजय रमन की कार्यशैली में सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि वे चुनौतियों का सामना स्वयं आगे रहकर करते थे। उनके निर्णयों में व्यक्तिगत हित से अधिक कर्तव्य, संस्था और टीम के हित को प्राथमिकता रहती थी। यही कारण था कि उनके साथ कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बीच उनके प्रति सम्मान और विश्वास बना रहा।

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि ‘खाकी वर्दी का योद्धा’ केवल एक पुलिस अधिकारी के जीवन का दस्तावेज नहीं है, बल्कि इसमें पुलिस सेवा के विभिन्न दौर, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों, महत्वपूर्ण अभियानों और वास्तविक अनुभवों को संजोया गया है। यह पुस्तक वर्तमान एवं भावी पुलिस अधिकारियों के लिए अनुभवों से सीख लेने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि पुस्तक पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ पत्रकारों और आम पाठकों के लिए भी उपयोगी है, क्योंकि इसमें पुलिस सेवा के व्यावहारिक एवं मानवीय पक्षों को समझने का अवसर मिलता है।

मकवाणा ने कहा कि विजय रमन जैसे अधिकारियों का जीवन यह बताता है कि पुलिस नेतृत्व केवल पद और अधिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वसनीयता, व्यक्तिगत आचरण, निर्णय क्षमता और टीम का विश्वास अर्जित करने से उसकी वास्तविक पहचान बनती है। उनके जीवन और सेवा से जुड़ी अनेक घटनाएं अपने आप में अत्यंत प्रेरक हैं।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय का भी अवलोकन किया। उन्होंने संग्रहालय में संरक्षित साहित्यिक एवं ऐतिहासिक धरोहर, पांडुलिपियों तथा संग्रहित सामग्री के संबंध में जानकारी प्राप्त की और संग्रहालय की गतिविधियों एवं उसके महत्व को जाना। स्वर्गीय विजय रमन की पत्नी वीना रमन तथा उनके परिवार की ओर से विजय रमन के व्यक्तित्व, पारिवारिक जीवन और पुलिस सेवा से जुड़े संस्मरण साझा किए गए।

वक्ताओं ने स्वर्गीय विजय रमन के दीर्घ पुलिस सेवा जीवन, उनकी कार्यशैली, नेतृत्व क्षमता, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनशीलता को स्मरण करते हुए कहा कि ऐसे अधिकारियों के अनुभव केवल स्मृतियां नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पुलिस सेवा के मूल्यों और कार्यसंस्कृति की महत्वपूर्ण विरासत हैं।

समारोह में पूर्व सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक संतोष कुमार राउत, सुरेंद्र सिंह, सेवानिवृत्त महानिदेशक पवन जैन, वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईपीएस एवं पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह, राजनीतिक विश्लेषक गिरिजा शंकर, मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार द्विवेदी, आयुर्वेद एवं पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. रश्मि झा सहित पुलिस विभाग के अनेक वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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