बीएमएचआरसी संस्थान में विद्यार्थियों के बीच सकारात्मक माहौल- डॉ मनीषा श्रीवास्तव

भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र भोपाल में 12-18 अगस्त तक एंटी रैगिंग डे-वीक मनाया जाएगा। इसी परिप्रेक्ष्य में बीएमएचआरसी संस्थान में आज एंटी रैगिंग पर एक व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। रैगिंग विरोधी दिवस 2026 का मुख्य उद्देश्य एक सुरक्षित, सम्मानित और रैगिंग-मुक्त परिसर का निर्माण करना है। इस वर्ष की थीम है-“रैगिंग को ना कहें, सम्मान करें, समर्थन करें, रक्षा करें”।
संस्थान की प्रभारी निदेशक डॉ मनीषा श्रीवास्तव ने सभागार को संबोधित करते हुए कहा कि मेरे विचार में रैगिंग शब्द को ही हटा देना चाहिए, क्योंकि इसका मतलब अपमान और प्रताड़ित करना होता है। किसी के परिवेश, वेषभूषा को लेकर मज़ाक उड़ाना या तिरस्कार करना ठीक नहीं है। उन्होने कहा कि प्रसन्नता की बात है कि बीएमएचआरसी संस्थान में विद्यार्थियों के बीच सकारात्मक माहौल है, जहां सीनियर विद्यार्थी अपने जूनियर के लिए मददगार हैं, और उनका मार्गदर्शन दे रहे हैं। सीनियर अपने अनुभव के आधार पर जो सहयोग जूनियर का कर सकते हैं वह सहयोग कोई नहीं कर सकता। जूनियर को भी अपने सीनियर एवं शिक्षक को अपने भरोसे में लेना चाहिए ताकि दोनों के बीच समन्वय बना रहे। कभी-कभी सीनियर की मदद से ही बहुत सारी समस्याएँ सुलझाई जा सकती हैं इसलिए जूनियर को सीनियर के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना चाहिए। सीनियर को भी चाहिए कि वे अपने ईगो पर विजय प्राप्त करें एवं ईगो को छोड़कर जूनियर के स्थान पर अपने आप को रखकर ही जूनियर के साथ व्यवहार करें।
डॉ मनीषा ने अपना स्वयं का अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्होने अपने से जूनियर को पढ़ाकर उसकी मदद की। उन्होने बताया कि गांधी जी का “अन्त्योदय” या “कल्याण” का सूत्र कहता है कि किसी भी काम को करने से पहले सोचें कि वह सबसे गरीब और कमजोर व्यक्ति की मदद करेगा या नहीं। यदि उससे उस इंसान का भला होता है, तो वह काम सही है।
डॉ मनीषा ने कहा कि संस्थान में शिक्षक-विद्यार्थियों के बीच संबंध को मजबूत करने के लिए मेंटी-मेंटर जैसी व्यवथित प्रणाली संचालित है। टीचर्स को चाहिए कि वे विद्यार्थियों के प्रति सहिष्णुता का भाव रखें, क्योंकि आज जो विद्यार्थी है वो कल कहीं जाकर शिक्षक की भूमिका में हो सकता है, यदि उसे विद्यार्थी जीवन में अपने शिक्षक से सहयोग मिला तो वह भी अपने जीवन में विद्यार्थियों का सहयोग करेगा। संस्थान की भूमिका हमेशा से एक प्रकाश स्तंभ की तरह रही है। यहाँ से जो भी सीखकर चिकित्सक और पीजी विद्यार्थी गए हैं, उससे उन्होने दूसरों को प्रकाशमान कर संस्था को गौरवान्वित किया है।
इस अवसर पर संस्थान की डीन (एकेडमिक) डॉ सुरभि सहाय ने कहा कि परिसर की नियमित निगरानी के लिए ‘एंटी-रैगिंग कमेटी’ और ‘एंटी-रैगिंग स्क्वाड’ का गठन किया गया है, जो कक्षाओं, छात्रावासों, कैंटीन और अन्य प्रमुख स्थानों पर लगातार सक्रिय रहेंगे। संस्थान में परिसर और छात्रावासों में रैगिंग की रोकथाम के लिए शून्य-सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति लागू है। साथ ही छात्र कल्याण और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ सौम्या शर्मा, टीचिंग फ़ैकल्टी, रेकी सेंटर बीएमएचआरसी ने अपने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के द्वारा समझाया कि सीनियर-जूनियर के बीच पावर इमबेलेन्स होने के कारण ही रेगिंग जैसी समस्याएं देखने में आतीं हैं। इसलिए दोनों को चाहिए कि आपसी व्यवहार में मान-सम्मान का ध्यान रखा जाए। उन्होने कहा कि यदि देखा जाए तो सभी लोगों में बुराइयाँ होती हैं, पर अच्छाइयाँ भी तो होती हैं। सभी को चाहिए कि बुराइयों को छोड़कर अच्छाइयों को अपनाएं।
कार्यक्रम के अंत में एंटी रैगिंग डे-वीक के दौरान आयोजित पोस्टर एवं स्लोगन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया ।कार्यक्रम में प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ अनुराग यादव के साथ फ़ैकल्टीगण एवं विद्यार्थीगण मौजूद थे। प्रोफेसर डॉ सुखप्रीत ने फ़ैकल्टी सदस्य और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।





