NTA ने जारी किया 2026-27 का परीक्षा कैलेंडर, JEE Main जनवरी में और CUET PG मार्च में

पटना
 नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने दिसंबर 2026 और वर्ष 2027 के लिए विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश व प्रतियोगी परीक्षाओं का आधिकारिक कैलेंडर जारी कर दिया है।

इस कैलेंडर में आगामी जेईई मेन, सीयूईटी पीजी और यूजीसी नेट के लिए अभी से अपनी तैयारी की रूपरेखा है। दिसंबर 2026 से मार्च 2027 तक कुल 14 परीक्षाओं का आयोजन होगा।

एनटीए द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार दिसंबर 2026 चक्र की शुरुआत छह दिसंबर को राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कालेज (आरआइएमसी) की परीक्षा के साथ होगी।

दिसंबर 2026 से मार्च 2027 तक होंगी 14 परीक्षाएं
इसके बाद आठ से 12 दिसंबर तक स्वयं की परीक्षा चलेगी। 13 दिसंबर को राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल की परीक्षा आयोजित होगी।

उच्च शिक्षा में करियर बनाने के इच्छुक छात्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक, यूजीसी नेट (दिसंबर), 14 से 19 दिसंबर 2026 के बीच आयोजित की जाएगी।

इस परीक्षा के लिए 20 और 21 दिसंबर को बफर (आरक्षित) दिन के रूप में रखा गया है। ज्वाइंट सीएसआइआर यूजीसी नेट (दिसंबर) की परीक्षा 20 और 21 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

जेईई मेन और सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा
वर्ष 2027 की शुरुआत चार जनवरी को आर्मी कैडेट कालेज की एक दिवसीय परीक्षा से होगी। 10 जनवरी 2027 को श्रेष्ठा और निफ्ट प्रवेश परीक्षा एक साथ आयोजित की जाएंगी।

इंजीनियरिंग के लिए देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा, जेईई (मेन) का पहला सत्र (जनवरी), 22 से 24 और 28 से 30 जनवरी 2027 के बीच आयोजित होगा।

इसके लिए 31 जनवरी को बफर डे रखा गया है। 31 जनवरी 2027 को ही अखिल भारतीय सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा भी आयोजित की जाएगी।

इसके बाद, फरवरी माह में सात तारीख को कामन मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट (सीमैट) तथा 26-27 फरवरी को एनआइटीटीटी की परीक्षा आयोजित की जाएगी।

17 दिनों तक चलेगी सीयूईटी पीजी
केंद्रीय विश्वविद्यालयों के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए सीयूईटी (पीजी) का आयोजन एक से पांच, आठ, 12 से 20 और 24-25 मार्च 2027 तक किया जाएगा।

यह परीक्षा 17 दिनों तक चलेगी, जिसके लिए 30 और 31 मार्च को बफर दिन आरक्षित हैं। इसके अलावा, एनआइटीटीटी (पार्ट 2) की परीक्षा छह और सात मार्च 2027 को निर्धारित है।

एनटीए ने कैलेंडर के अंत में स्पष्ट किया है कि ये सभी घोषित तारीखें संभावित हैं और किसी भी प्रशासनिक या लाजिस्टिक कारणों से भविष्य में इनमें बदलाव किया जा सकता है।

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