भोपाल की गैस एजेंसी में गड़बड़ी, FIR की तैयारी: खाद्य विभाग ने एडीएम को सौंपी रिपोर्ट, एक एजेंसी रिटायर्ड अफसर की

भोपाल 

राजधानी भोपाल में गैस एजेंसियों से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां खाद्य विभाग की जांच में भारी अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जेके रोड स्थित फीनिक्स एचपीसीएल और कोटरा सुल्तानाबाद की बीएस एचपी गैस एजेंसी में सिलेंडर स्टॉक, सप्लाई और बिलिंग में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं। जांच रिपोर्ट एडीएम प्रकाश नायक को सौंप दी गई है, जिसके बाद संबंधित एजेंसियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की तैयारी शुरू हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक हजारों गैस सिलेंडर गायब पाए गए हैं और उपभोक्ताओं को बिना डिलीवरी के ही ‘डिलीवर्ड’ दिखाया गया। अधिकारियों के अनुसार यह मामला बड़े स्तर की वित्तीय अनियमितता और उपभोक्ता ठगी से जुड़ा हो सकता है।
भोपाल के जेके रोड स्थित फीनिक्स एचपीसीएल और कोटरा सुल्तानाबाद स्थित बीएस एचपी गैस एजेंसियों की जांच पूरी हो गई है। इसके बाद खाद्य विभाग ने जांच रिपोर्ट एडीएम प्रकाश नायक को सौंपी है। दो में से एक एजेंसी खाद्य विभाग के ही रिटायर्ड अफसर और उनके रिश्तेदार की है। बता दें कि एजेंसियों में गैस सिलेंडर की सप्लाई की शिकायत मिली थी। इसके बाद फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने टीम से जांच करवाई थी। जांच में सामने आया कि करीब 36 हजार वर्गफीट क्षेत्र में दोनों एजेंसियों के साझा गोदाम बने हैं।

दोनों एजेंसियां का रिटायर्ड सहायक आपूर्ति अधिकारी से कनेक्शन

जांच में एजेंसियां रिटायर्ड सहायक आपूर्ति अधिकारी बीपी शर्मा और उनके रिश्तेदारों की होना सामने आया है। फूड कंट्रोलर जादौन ने बताया कि जांच रिपोर्ट  को कलेक्टर को सौंपी। आगे की कार्रवाई कलेक्टर द्वारा की जाएगी।

स्टॉक जांच में सबसे बड़ी गड़बड़ी फीनिक्स एजेंसी में मिली। यहां 350 घरेलू, 350 कमर्शियल, और 2 हजार 5 किलोग्राम वाले छोटू सिलेंडर गायब थे। बीएस एजेंसी के गोदाम में भी 254 भरे सिलेंडर गायब मिले। यहां कमर्शियल सिलेंडरों के स्टॉक में भी गड़बड़ी सामने आई। जांच में एजेंसियां रिटायर्ड सहायक आपूर्ति अधिकारी बीपी शर्मा और उनके रिश्तेदारों की होना सामने आया है।

मुख्य विवरण
जांच में सामने आया कि फीनिक्स एजेंसी से 350 घरेलू, 350 कमर्शियल और करीब 2 हजार छोटे सिलेंडर गायब हैं। वहीं बीएस एजेंसी के गोदाम से भी 254 भरे सिलेंडर कम पाए गए।रिपोर्ट्स के अनुसार कई उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन गैस बुकिंग की, लेकिन उन्हें सिलेंडर कभी नहीं मिला। इसके बावजूद सिस्टम में डिलीवरी पूरी दिखा दी गई। जांच में यह भी पाया गया कि ऐसे सिलेंडर ज्यादा कीमत लेकर अन्य ग्राहकों को बेच दिए गए।

मिड हेडिंग: फर्जी बिलिंग का खेल
जांच में फर्जी बिलिंग और अतिरिक्त वसूली का मामला भी सामने आया है।एजेंसी द्वारा उपभोक्ताओं से होम डिलीवरी चार्ज लेने के बावजूद उन्हें खुद आकर सिलेंडर लेने पर मजबूर किया गया।बताया गया कि ‘कैश एंड कैरी’ के नाम पर हर महीने लाखों रुपए की अवैध वसूली की जा रही थी। इसके अलावा 238 रुपए का फर्जी ‘सुरक्षा निरीक्षण शुल्क’ लेकर करीब 10 लाख रुपए तक की वसूली का मामला भी उजागर हुआ है।

खाद्य विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि गैस सिलेंडर की सप्लाई में गड़बड़ी हो रही है। इसके बाद फूड कंट्रोलर ने टीम गठित कर जांच शुरू कराई।जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दोनों एजेंसियों का साझा गोदाम करीब 36 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बना है और संचालन में पारदर्शिता की कमी है। एक एजेंसी रिटायर्ड सहायक आपूर्ति अधिकारी और उनके रिश्तेदारों से जुड़ी बताई जा रही है।

मिड हेडिंग: सप्लाई में हेरफेर
ट्रांसपोर्ट और सप्लाई सिस्टम में भी गड़बड़ी मिली है।रिपोर्ट के अनुसार गैस सिलेंडर लेकर आने वाले ट्रक तय समय से कई घंटे देरी से पहुंचे, जिससे बीच में हेरफेर की आशंका जताई गई है।इसके अलावा एजेंसी द्वारा बताए गए 9 डिलीवरी वाहनों में से केवल 5 ही सक्रिय पाए गए, जिससे वितरण प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

आधिकारिक बयान
अधिकारियों के अनुसार यह मामला गंभीर है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।सूत्रों के मुताबिक 10 से 12 मामलों की जांच रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी गई है और जल्द ही FIR दर्ज हो सकती है।जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि एजेंसियों का लाइसेंस निरस्त करने का प्रस्ताव भी भेजा जाएगा।

प्रभाव / विश्लेषण
इस मामले ने शहर के हजारों गैस उपभोक्ताओं को प्रभावित किया है।बिना डिलीवरी के भुगतान, फर्जी बिलिंग और अवैध वसूली जैसी गतिविधियों से लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला गैस वितरण प्रणाली में निगरानी की कमी को उजागर करता है और इससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े होते हैं।

प्रशासन अब इस मामले में सख्त कार्रवाई के मूड में है।FIR दर्ज होने के बाद संबंधित एजेंसियों के संचालकों पर कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और लाइसेंस रद्द होने की संभावना है। आने वाले दिनों में अन्य गैस एजेंसियों की भी जांच तेज हो सकती है, ताकि इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके। 

सिलेंडर बुक हुए, लेकिन ग्राहकों तक पहुंचे ही नहीं जांच में सामने आया कि गैस एजेंसियों के संचालकों ने बड़ी संख्या में सिलेंडरों का हेरफेर किया है। जिन्होंने ऑनलाइन गैस सिलेंडर बुक कराए थे, एजेंसियों की ओर से उन उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं पहुंचाए। जब उपभोक्ता एजेंसियों पर पहुंचे तो पता चला कि उनको सिलेंडर की डिलीवरी हो गई है, जबकि उपभोक्ताओं तक सिलेंडर पहुंचे ही नहीं थे।

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि सिलेंडर अधिक पैसे लेकर किसी और को दिए गए। एजेंसियों के गोदाउन में स्टॉक के अनुसार भी सिलेंडर नहीं पाए गए। इतना नहीं शहर इन एजेंसियों की अलावा अन्य एजेंसियों व अवैध परिवहन, अवैध रिफिलिंग करने वालों की भी जांच रिपोर्ट एडीएम को दी गई है।

10 से 12 मामलों की जांच रिपोर्ट सौंपी गई है। ऐसे में इन एजेंसियों के संचालकों व अवैध गैस सिलेंडरों का परिवहन व रिफिलिंग करने वालों पर जुर्माना व एफआईआर तक कार्रवाई हो सकती है। एजेंसियों का लाइसेंस निरस्त करने के लिए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के अनुमोदन पर एडीएम संबंधित गैस कंपनियों को एजेंसियों का लाइसेंस निरस्त करने का प्रस्ताव जल्द भेजा सकता है।

238 रुपए का फर्जी सुरक्षा चार्ज, 10 लाख की वसूली उजागर जेके रोड स्थित मीनाल रेसिडेंसी की मेसर्स फिनिक्स एचपीसीएल गैस एजेंसी में 10 तरह की गड़बड़ियां मिली हैं।

जानिए क्या हैं वो 10 प्रकार की गड़बड़ियां, इनके जरिए कैसे उपभोक्ताओं के साथ की गई ठगी—

1- जेके रोड मिनाल स्थित मेसर्स फिनिक्स एचपी गैस एजेंसी में 15 अप्रैल 2026 को 250 से ज्यादा उपभोक्ताओं के ओटीपी के आधार पर ऑनलाइन बिल जनरेट किए गए। लेकिन उपभोक्ताओं को ऑफलाइन बिल 16 अप्रैल का काटकर दिया गया। लोगों को होम डिलीवरी की जगह एजेंसी के पीछे खड़े ट्रकों से सिलेंडर दिए गए।

2- मौके पर पाया गया कि एजेंसी द्वारा 16 अप्रैल 2026 को उपभोक्ताओं से प्रति सिलेंडर 918 रुपए लिए गए, जिसमें होम डिलीवरी शुल्क भी शामिल था। जबकि मौके पर सिलेंडर देने पर 34 रुपए घटाकर नया बिल दिया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं किया गया। इससे अनुमान है कि हर महीने 10 से 12 हजार सिलेंडरों में से 6 हजार सिलेंडरों पर ‘कैश एंड कैरी’ के नाम पर करीब 2 लाख रुपए अवैध वसूली की गई।

3- एजेंसी के पीछे खाली मैदान में सिलेंडर वितरण के दौरान सुरक्षा निरीक्षण (मेंटेटरी इंस्पेक्शन) के नाम पर 238 रुपए लेकर कैश मेमो दिया गया। जबकि यह निरीक्षण उपभोक्ता के घर जाकर किया जाना चाहिए था। एजेंसी ने बिना निरीक्षण के ही राशि ली और बिल जारी करने को इस भुगतान से जोड़ दिया। करीब 25 हजार कनेक्शन में से 5 हजार उपभोक्ताओं से लगभग 10 लाख रुपए वसूले गए।

4- बुकिंग के बाद भी उपभोक्ताओं को घर पर सिलेंडर नहीं पहुंचाया गया, लेकिन मोबाइल पर ‘डिलीवर्ड’ का मैसेज भेज दिया गया। जांच में सामने आया कि ऐसे सिलेंडर डिलीवरी कर्मियों द्वारा अन्य जगहों पर बेच दिए गए। एजेंसी ने सफाई दी कि उपभोक्ता घर पर नहीं मिले, जो सही नहीं पाया गया।

5- 1 अप्रैल से जांच तक करीब 2 हजार ऑनलाइन बुकिंग लंबित मिलीं। उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं दिया गया और उन्हें वेटिंग में रखा गया।

6- 9 अप्रैल को जारी इनवॉइस का लोड 10 अप्रैल को मिला, लेकिन 15 अप्रैल तक नया लोड नहीं आया। एचपीसीएल के विक्रय अधिकारी के अनुसार एजेंसी ने ओटीपी सिस्टम का पालन नहीं किया और बिना ओटीपी के बिक्री दर्ज कर सिलेंडर अन्य जगह बेच दिए। इसी कारण कंपनी ने सप्लाई रोक दी थी।

7- अप्रैल 2026 में डिपो पीलूखेड़ी (जिला राजगढ़) से 11 ट्रकों की जानकारी दी गई। दूरी के हिसाब से 2–2.5 घंटे लगने चाहिए थे, लेकिन ट्रक 24 घंटे बाद पहुंचे। 11 में से 10 बार ऐसा हुआ, जिससे बीच में ट्रक कहां रुके—यह संदिग्ध है।

8- एजेंसी ने 9 डिलीवरी वाहन बताए, लेकिन मौके पर केवल 5 ही सक्रिय मिले।

9- स्टॉक में गड़बड़ी मिली—करीब 2 हजार छोटे सिलेंडर गायब पाए गए, जबकि 40 घरेलू सिलेंडर अतिरिक्त मिले।

10- 17 अप्रैल को नीलबड़ हरिनगर स्थित गोदाम की आकस्मिक जांच में स्टॉक और कैश एंड कैरी रेट का प्रदर्शन नहीं मिला। गोदाम करीब 36 हजार वर्गफुट क्षेत्र में है, जहां दो गोदाम संचालित हैं। दूसरा गोदाम बीएस सर्विसेस गैस एजेंसी (कोटरा सुल्तानाबाद) का है, जो एचपीसीएल की ही सिस्टर कंपनी है। दोनों गोदाम आवासीय क्षेत्र से सटे पाए गए। बीएस सर्विसेस के संचालक सुयश शर्मा पाए गए, जिनकी भी जांच की गई।

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