7 दिन में 187 भूकंप से हिली धरती! ‘रिंग ऑफ फायर’ में क्यों बढ़ी हलचल?

नई दिल्ली

प्रशांत महासागर के आसपास का इलाका दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप वाले क्षेत्रों में गिना जाता है. पिछले एक हफ्ते में जापान, इंडोनेशिया, अलास्का और अमेरिका के पश्चिमी हिस्सों समेत कई जगहों पर भूकंप दर्ज किए गए. इसी दौरान 4.5 या उससे ज्यादा तीव्रता के कुल 187 भूकंप दर्ज हुए, जिनमें इंडोनेशिया के पास आया 7.7 तीव्रता का भूकंप सबसे बड़ा रहा। 

इन भूकंपों के बीच 'रिंग ऑफ फायर' एक बार फिर चर्चा में है. हालांकि, 187 भूकंपों का आंकड़ा सिर्फ रिंग ऑफ फायर का नहीं है. यह पूरी दुनिया में एक हफ्ते के दौरान आए 4.5 या उससे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंपों का आंकड़ा है. इसलिए इस संख्या को किसी बड़े भूकंप की सीधी चेतावनी मानना सही नहीं होगा। 

क्या है रिंग ऑफ फायर?
रिंग ऑफ फायर प्रशांत महासागर के चारों तरफ फैला एक बड़ा इलाका है. इसकी लंबाई करीब 40 हजार किलोमीटर है. इस इलाके में धरती की कई बड़ी प्लेटें एक-दूसरे के पास आती हैं और लगातार धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं। 

इसी प्लेटों की हलचल के कारण यहां भूकंप और ज्वालामुखी ज्यादा आते हैं. जापान, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड, अलास्का और अमेरिका के पश्चिमी हिस्से इसी इलाके से जुड़े हैं. दुनिया के करीब 90 फीसदी भूकंप इसी इलाके के आसपास आते हैं। 

एक हफ्ते में आए कई बड़े भूकंप
पिछले एक हफ्ते में सबसे बड़ा भूकंप इंडोनेशिया के पास आया. इसकी तीव्रता 7.7 रही. इसके बाद उत्तरी इंडोनेशिया में 6.9 और दक्षिणी पेरू में 6.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. इसके अलावा जापान, अलास्का और अमेरिका के पश्चिमी हिस्सों में भी 4.5 या उससे ज्यादा तीव्रता के कई भूकंप आए. बड़े भूकंप के बाद छोटे झटके आना आम बात है. इन्हें आफ्टरशॉक कहा जाता है। 

क्या 187 भूकंप किसी बड़े खतरे का संकेत हैं?
सिर्फ भूकंपों की संख्या देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि जल्द कोई बड़ा भूकंप आने वाला है. वैज्ञानिक अभी किसी भूकंप की सही तारीख, जगह और तीव्रता पहले से नहीं बता सकते. कैलिफोर्निया और तुर्की जैसे इलाकों में भूकंप का खतरा जरूर बना रहता है, क्योंकि ये भी एक्टिव भूकंपीय क्षेत्रों में आते हैं। 

187 भूकंपों के आंकड़े को इन जगहों पर आने वाले किसी बड़े भूकंप से जोड़ने का कोई पक्का वैज्ञानिक आधार नहीं है. दुनिया में हर दिन छोटे-बड़े भूकंप आते रहते हैं. इसलिए सात दिनों में 187 भूकंपों का आंकड़ा ध्यान खींचता जरूर है, लेकिन सिर्फ इस आंकड़े से किसी बड़ी आपदा की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। 

 

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