300 साल पुराने गंगेश्वरी मठ का संपत्ति विवाद कोर्ट पहुंचा:महंत बोले- कुछ लोगों की जमीन पर नजर इसलिए प्रशासन ने समिति बदली

हरदा की टिमरनी तहसील में 300 साल पुराने गंगेश्वरी मठ के प्रबंधन को लेकर विवाद गहरा गया है। दिसंबर 2024 में हुई प्रशासनिक बैठक में मठ की प्रबंध समिति बदलकर महंत विष्णु भारती को उपाध्यक्ष बना दिया गया था और नए सदस्य जोड़े गए थे। विष्णु भारती ने अब हाई कोर्ट में अपील की है।

उनका आरोप है कि दिसंबर 2024 में तत्कालीन कलेक्टर आदित्य सिंह ने एक सामाजिक संस्था से जुड़े निरंजन शर्मा के दबाव में नई प्रबंध समिति बनवा दी, जिसमें बाहरी लोग जोड़ दिए। इसके बाद गोशाला निर्माण के लिए 70 एकड़ जमीन आवंटित कर दी गई। गौरतलब है कि मठ क्षेत्र में 270 एकड़ जमीन है। कई जिलों में इस ट्रस्ट की जमीनें हैं।

मामले से जुड़े चार पक्ष… सबकी अपनी दलीलें, पूर्व कलेक्टर पर भी आरोप – डरा-धमकाकर बदलाव किए गए

विष्णु भारती : मुझे मठ से बाहर करने की साजिश

विष्णु भारती नेकहा कि उन्हें महंत का पद पूर्व महंत बालकृष्ण भारती से गुरु-शिष्य परंपरा में 2021 में मिला था। 2009 में भी प्रशासन ने इसी तरह प्रबंधन बदलकर शिवशंकर भारती को महंत बना दिया था। कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें 2021 में पद मिल सका। अब उन्हें समिति में उपाध्यक्ष बनाकर मठ से बाहर करने की साजिश है। क्षेत्र में वैदिक विद्यापीठ चलाने वाले निरंजन शर्मा मठ की जमीन पर कब्जा चाहते हैं। उन्हीं के इशारे पर प्रशासन ने बदलाव किए थे।

निरंजन शर्मा : लंबे समय से गड़बड़ियां चल रही थीं

वैदिक विद्यापीठ से जुड़े निरंजन शर्मा के मुताबिक, प्रबंधन प्रशासन ने बदला है, क्योंकि उसकी व्यवस्था लंबे समय से ठीक नहीं रही। बालकृष्ण और विष्णु भारती ने जमीन बेची हैं। न मठ का बैंक खाता है, न कोई हिसाब-किताब। वैदिक विद्यापीठ-गोशाला बहुत पहले बंद हो चुकी है। उन पर आरोप क्यों लगे, इस प्रश्न पर शर्मा ने कहा कि वे क्षेत्र में विद्यापीठ चलाते हैं इसलिए शायद महंत को लग रहा है कि मैं मठ पर भी नियंत्रण चाहता हूं। 40 सालों में मठ का विकास नहीं हुआ। स्थानीय लोगों को ही प्रबंधन में रखा गया है।

प्रशासन : हम निष्पक्ष, कोर्ट जो निर्देश देगा, पालन करेंगे

कलेक्टर सिद्धार्थ जैन का कहना है कि महंत प्रशासन की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थे, इसलिए हाई कोर्ट गए हैं। प्रशासन निष्पक्ष है, जो कोर्ट निर्देश देगा, पालन करेंगे। मठ की जमीनों पर अतिक्रमण पर उन्होंने कहा कि पूरी जमीन अतिक्रमण मुक्त कराएंगे। जहां फसल लगी है, काटने के बाद दोबारा नहीं लगने दी जाएगी। पूर्व कलेक्टर आदित्य सिंह ने आरोपों पर कहा कि वे अब हरदा में पदस्थ नहीं हैं, इसलिए टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। बेहतर होगा कि वर्तमान कलेक्टर मामले पर शासन का पक्ष रखें।

अध्यक्ष : नई समिति सिर्फ व्यवस्था में सुधार लाएगी

मठ प्रबंधन समिति में अध्यक्ष बनकर जुड़े डॉ. विवेक भुस्कुटे ने कहा, मठ के खिलाफ स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद प्रशासन ने एक्शन लिया था। एकल सदस्य वाले ट्रस्ट का न तो पैन था, न बैंक खाता और न कोई व्यवस्थित ऑडिट। नई समिति सिर्फ मठ की व्यवस्था में सुधार करके आय बढ़ाएगी। पूजा पाठ आदि महंत के जिम्मे ही रहेगा। नए प्रबंध से भूमाफिया को ही दिक्कत है। हालांकि वो स्पष्ट नहीं कर सके कि 2021 से पहले अतिक्रमण और मठ की अव्यवस्था पर पहल क्यों नहीं हुई?

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