ओरछा में अवैध खनन का मामला:पहले 426 करोड़ का जुर्माना, अपील में 26 करोड़ किया

अवैध खनन की जांच और जुर्माने की यह कहानी बेहद दिलचस्प है। इसकी शुरुआत होती है मई 2023 से। ओरछा के जिजोरा गांव में अवैध खनन की शिकायत हुई। खनिज विभाग की टीम पहुंची। जांच में 11.86 लाख घन मीटर बोल्डर का अवैध खनन पाया और 426 करोड़ की वसूली का केस बनाया गया। इसमें 14.23 करोड़ की रॉयल्टी, 15 गुना पेनल्टी यानी 213 करोड़ और इतनी ही राशि पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में शामिल थी।

सितंबर 2023 : मामले में आरोपी बनाए गए खनन कारोबारी सुनील गुप्ता ने कलेक्टर के पास अपील की और कहा, ये कार्रवाई स्थानीय लोगों के दबाव में हुई है। तत्कालीन कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा ने राजस्व और खनिज विभाग का संयुक्त दल गठित कर ‘यथाशीघ्र’ दोबारा जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।

मई 2024 : टीम ने दोबारा जांच की। इस बार 1,73,000 घन मीटर अवैध खनन पाया। 26 करोड़ की पेनल्टी का संशोधित प्रकरण बना। इसकी भी शिकायत हुई, जिसकी जांच कलेक्टर के पास लंबित है।

अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप.. शिकायत के बाद कलेक्टर के पास जांच लंबित

सफाई… एक खनिज अधिकारी बोले- मुझे याद नहीं, दूसरे ने कहा- तब मैं नया था

ये कहानी जितनी दिलचस्प है, उतने ही मजेदार हैं, इससे जुड़े किरदारों के बयान। सबसे पहले तत्कालीन प्रभारी खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा की बात सुनिए। उनका कहना है, शिकायत के बाद बड़ा खनन का गड्ढा मिला था तो प्रकरण बनाकर कलेक्टर कार्यालय को दे दिया था। ज्यादा डिटेल याद नहीं।

वर्तमान प्रभारी खनिज अधिकारी अजय मिश्रा का कहना है कि मैं उस समय निरीक्षक के तौर पर नया था तो गलती से स्वीकृत क्षेत्र में अवैध खनन का प्रकरण बन गया था, अपील के बाद गलती सुधार ली। दूसरी बार राजस्व का अमला भी साथ में था। उन्होंने 25 करोड़ का दोगुना लगभग 54 करोड़ वसूली का मामला डीएम कोर्ट को देने की बात कही, हालांकि भास्कर के पास उपलब्ध दस्तावेजों में 26 करोड़ पेनल्टी का जिक्र है।

दस्तावेजों में 2024 की जांच में शामिल दिखाए गए तहसीलदार सुमित गुर्जर ने जांच में शामिल होने से ही इनकार कर दिया। तो निवाड़ी कलेक्टर लोकेश जांगिड़ का कहना है कि शिकायत आई थी, पर देख नहीं पाए हैं। जल्द देखकर वस्तुस्थिति बताएंगे।

शिकायतकर्ता का आरोप- कारोबारी को बचा रहे निवाड़ी के शिकायतकर्ता अब्दुल कलाम ने पूर्व और वर्तमान कलेक्टर को शिकायत के साथ 180 पेज के साक्ष्य दिए हैं। कलाम ने पंकजध्वज मिश्रा सहित अन्य अधिकारियों पर सुनील गुप्ता को बचाने का आरोप लगाया है। खनिज नियमों के तहत तत्काल एफआईआर करके मशीनें जब्त होनी थीं, जो नहीं की गई। मशीनों की जब्ती व एफआईआर क्यों नहीं हुई, इस पर भास्कर ने भी सवाल किया, लेकिन दोनों खनिज अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।

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