ईरान-अमेरिका जंग के बीच फिल्ममेकर जफर पनाही की स्वदेश वापसी, नरसंहार और अमेरिकी कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा

ईरान-अमेरिका के बीच जंग खतरनाक मोड़ ले चुकी है. दोनों देश झुकने को तैयार नहीं हैं. तेल और ताकत की लड़ाई में होर्मुज की लहरों में हड़कंप मचा है. हालात और भी बिगड़ने का अंदेशा है. लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर के ख्याति प्राप्त फिल्ममेकर जफर पनाही ने ईरान में वापसी करके दुनिया को चौंका दिया. उन्होंने ईरान लौटने से पहले कहा कि उनके देश में हालात नरसंहार जैसा है. उन्होंने अमेरिकी कार्रवाई की निंदा भी की. अंतरराष्ट्रीय फिल्म बिरादरी जफर के इस कदम को बहुत ही सराहनीय और साहसी मान रही है. अमेरिका से युद्ध के बीच ‘इट वाज़ जस्ट एन एक्सीडेंट’ जैसी बहुप्रशंसित फिल्म बनाने वाले जफर पनाही ने स्वदेश से प्यार का इजहार किया.

गौरतलब है कि जफर पनाही की ईरानी सरकार की सेंसरशिप से अदावत की कहानी किसी से छुपी नहीं है. उन्होंने पूर्व ईरानी सत्ता के खिलाफ खुली बगावत की थी. ईरानी सरकार को क्रूर और तानाशाह करार दिया, पूर्व सरकार की नीतियों की जमकर बखिया उधेड़ी और ऐसी फिल्में बनाईं जो सीधे-सीधे सत्ता की आलोचना करती थीं. राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की पीड़ा को व्यक्त करने वाली उनकी फिल्मों में दमन के खिलाफ आवाज बुलंद की गई थी. कोई हैरत नहीं कि जफर पनाही को अपने बागी तेवर की वजह से खामियाजा भी भुगतना पड़ा.

नामो-निशान मिटाने वालों के खिलाफ जंग
जंगी हालात में भी जफर पनाही ने ईरान की राह चुनी. अमेरिका, फ्रांस या अन्य यूरोपीय देशों में नहीं रुकना चाहा बल्कि वतन वापसी की. स्वदेश लौटने से पहले उनका एक बयान जो मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से सामने आया है, वह ध्यान देने वाला है. उन्होंने एक समारोह में कहा था कि आज ईरान में नरसंहार हो रहा है, ईस्लामी गणराज्य अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है, जो भी खून-खराबा हो रहा है, वह नामो-निशान मिटाने वालों के इरादों के खिलाफ है. पता चला है कि चारों ओर लाशों का ढेर है, जो बचे हैं वे अपने चाहने वालों की निशानियां खोज रहे हैं. ऐसे हालात में जफर ने ईरान में वापसी की.

फिल्म बिरादरी से बोलने की अपील
जफर पनाही ने इसके आगे जो कहा, वह और भी भावुक कर देने वाला है. उन्होंने कहा कि ये हालात कोई कहानी नहीं है. यह कोई फिल्म भी नहीं है. गोलियों से छलनी कठोर वास्तविकता है. इसी के साथ जफर पनाही ने कलाकारों और सिनेमा की विश्व बिरादरी से अपना-अपना कर्तव्य निर्वाह करने की भी अपील की. जफर ने अंतरराष्ट्रीय फिल्मकारों से इस ज्वलंत मुद्दे पर खूब बोलने और खुल के बोलने का आह्वान किया.

जानकारी के मुताबिक जफर पनाही अपनी हालिया फिल्म ‘इट वाज़ जस्ट एन एक्सीडेंट’ के प्रचार अभियान के लिए ईरान से बाहर थे. इस फिल्म के लिए उनको मई 2025 में 78वें कान फिल्म फेस्टिवल में प्रतिष्ठित पाल्मे डी’ओर पुरस्कार मिला था. वहीं 98वें ऑस्कर अवॉर्ड में फ्रांस द्वारा प्रस्तुत इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म और सर्वश्रेष्ठ पटकथा के लिए नामांकन भी मिला. इसके अलावा इस फिल्म को दुनिया भर के फिल्मोत्सवों में बीसियों अवॉर्ड मिल चुके हैं.

ईरान पर हमले की कड़े शब्दों में निंदा
ईरानी फिल्म निर्माता ने पहले कहा ही था कि तमाम दुश्वारियों के बावजूद ऑस्कर समारोह संपन्न होने के बाद वो ईरान लौट जाएंगे. उड़ान पर प्रतिबंध की वजह से जफर पहानी वाया तुर्की सड़क मार्ग से 31 मार्च को ईरान पहुंचे. उन्होंने तमाम समारोह के संबोधनों में ईरान में हिंसा और दमन के खिलाफ आवाजें उठाई. ईरान पर हमले की कठोर शब्दों में निंदा भी की. उन्होंने अमेरिकी हमले के बाद उपजे हालात को नरसंहार करार दिया.

आपको बताते हैं कि आखिर क्यों अमेरिका से जंग के बीच जफर पनाही का ईरान लौटना काफी अहमियत रखता है. जफर पनाही ऐसे निर्माता-निर्देशक हैं जिनको ईरान सरकार के प्रतिबंध का सामना करना पड़ा था. क्योंकि उन्होंने अपनी फिल्मों में ईरान की तानाशाह सत्ता की कुरीतियों और बर्बर नीतियों की जमकर आलोचना की थी. जिसकी वजह से उन्हें एक साल जेल की सजा, दो साल तक यात्रा प्रतिबंध के अलावा उनकी फिल्ममेकिंग को भी बैन कर दिया गया था. जरा सोचिए कि फिल्ममेकर पर अगर फिल्म बनाने का प्रतिबंध लग जाए तो वह भी क्या करेगा.

बैन के बावजूद छुपकर फिल्में बनाई
लेकिन तमाम कड़े प्रतिबंधों के बावजूद जफर पनाही ने ईरान में रहते हुए, ईरानी सरकार के अत्याचार और दमन को सहते हुए, एक विद्रोही क्रांतिकारी की तरह छुपकर फिल्में बनाईं. उन फिल्मों में सेंसरशिप की नीतियों को जमकर धज्जियां उड़ाईं. महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ सामाजिक दमन को दिखाया. राजनीतिक विरोधियों को कुचलने की कहानी दिखाई. उन फिल्मों को प्रसिद्ध इंटरनेशनल फेस्टिवल तक लेकर पहुंचे, उनका प्रदर्शन कराया और वाहवाहियां बटोरीं. अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार हासिल किए.

सीमित संसाधनों में बनाई गई उनकी फिल्मों का विषय और प्रस्तुतिकरण काफी सराहा गया. उनकी फिल्मों का विषय प्रमुख तौर पर सामाजिक और राजनीतिक ही होते थे. उन फिल्मों में जफर ने खास तौर पर हिरासत और निगरानी में रहने के दौरान के कठोर अनुभवों को यथार्थवादी शैली में अभिव्यक्त किया था. उनकी फिल्ममेकिंग की शैली ने संवेदना बटोर ली.

जफर पनाही की प्रमुख फिल्में
साल 2025 की इट वाज़ जस्ट एन एक्सीडेंट के अलावा उनकी कई और प्रमुख फिल्में हैं जो ईरान में राजनीतिक विरोधियों के दमन की कहानी कहती हैं. साल 2015 में उन्होंने द टैक्सी बनाई थी, जिसने बर्लिन अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में गोल्डन बियर पुरस्कार जीता. 1995 की द व्हाइट बैलून उनकी पहली फिल्म थी. इसने भी कान्स में ‘कैमरा डी’ओर’ अवॉर्ड जीता था. इनके अलावा साल 2000 की ‘द सर्कल’ एक ऐसी फिल्म थी, जो ईरान में महिलाओं के दमन की कहानी कहती है, इसने वेनिस फिल्म महोत्सव में ‘गोल्डन लायन’ जीता था तो 2006 की ऑफसाइड ऐसी फिल्म थी, जो कि स्टेडियम में लड़कों का भेष बदलकर फुटबॉल मैच देखने जाने वाली लड़कियों की कहानी है. गौरतलब है कि ईरान में तब स्टेडियम में महिलाओं का जाना मना था.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button