भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के नवागंतुक विद्यार्थियों के लिए आयोजित 4 दिवसीय अभिमुखीकरण एवं अधिष्ठान समारोह “दीक्षारंभ-2025” के समापन

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने, भोपाल स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के नवागंतुक विद्यार्थियों के लिए आयोजित 4 दिवसीय अभिमुखीकरण एवं अधिष्ठान समारोह “दीक्षारंभ-2025” के समापन अवसर पर सहभागिता की।
तकनीकी शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार ने ट्रिपलआईटी संस्थान के नवागत विद्यार्थियों को राजा भोज की नगरी भोपाल में अभिनंदन किया। मंत्री परमार ने नवागत विद्यार्थियों के साथ रात्रि भोज के साथ परस्पर संवाद किया। परमार ने विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं प्रेषित की। मंत्री परमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में भारतीय ज्ञान परम्परा के परिप्रेक्ष्य में विविध उदाहरण प्रस्तुत किए। हीन भावना से मुक्त होकर, स्वत्व के भाव के साथ स्वाभिमान का जागरण करना होगा। अपने गौरवशाली ज्ञान, दर्शन, इतिहास एवं उपलब्धियों पर गर्व का भाव जागृत करना होगा।
मंत्री परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा में, पुस्तकालय सदैव ही समृद्ध रहे हैं। नालंदा विश्वविद्यालय में, विश्व का सबसे विशाल पुस्तकालय था और तब भारत विश्व गुरु की संज्ञा से सुशोभित था। विश्व भर के लोग, हमारे यहां शिक्षा ग्रहण करने आते थे। भारत का ज्ञान, सार्वभौमिक था। हमारी संस्कृति में ज्ञान का दस्तावेजीकरण नहीं था। हमारे पूर्वजों ने शोध एवं अध्ययन कर, ज्ञान को परंपरा के रूप में समाजव्यापी बनाया था। अतीत के विभिन्न कालखंडों में, योजनाबद्ध रूप से हमारे ज्ञान को दूषित करने का कुत्सित प्रयास किया गया। भारतीय समाज में विद्यमान परंपरागत ज्ञान को पुनः शोध एवं अनुसंधान के साथ, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के सापेक्ष युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में दस्तावेजीकरण से समृद्ध करने की आवश्यकता हैं। पुस्तकालय; मानवता, नवाचार और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण के मूल आधार हैं। भारतीय दृष्टिकोण से समृद्ध साहित्य से, समस्त पुस्तकालयों को समृद्ध करने की आवश्यकता है।
मंत्री परमार ने कहा कि देश के हृदय प्रदेश की संज्ञा से सुशोभित हिंदी भाषी मध्यप्रदेश ने, भारत की अनेकता में एकता की संस्कृति को चरितार्थ करते हुए एक नई पहल की है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में देश की सभी प्रमुख भाषा जैसे कन्नड़, तमिल, तेलगु , बांग्ला, असमिया आदि भारतीय भाषाएं सिखाई जाएंगी। इससे प्रदेश के विश्वविद्यालयों से, पूरे देश में भाषाई सौहार्दता का संदेश जाएगा।मंत्री परमार ने कहा कि भाषाएं जोड़ने का काम करती हैं, तोड़ने का नहीं; यह व्यापक संदेश प्रदेश के उच्च शैक्षणिक संस्थानों से देश भर में गुंजायमान होगा। हमारा यह नवाचार, देश भर में “भाषाई एकात्मता” का संदेश देगा।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री परमार ने नवागत विद्यार्थियों के शैक्षिक परिदृश्य से जुड़े विभिन्न प्रश्नों के उत्तर देते हुए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में हो रहे सतत् कार्यों से अवगत भी कराया।





