UP चुनाव 2027: BJP काट सकती है मौजूदा विधायकों के टिकट, 125 सीटों पर सर्वे पूरा

लखनऊ
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति पर काम तेज कर दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार जिलों का दौरा कर रहे हैं, वहीं पार्टी के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े भी अलग-अलग जिलों में संगठन की स्थिति और संभावित उम्मीदवारों को लेकर फीडबैक जुटा रहे हैं. चर्चा है कि तावड़े की टीम ने करीब 125 सीटों पर सर्वे पूरा कर लिया है. पार्टी का फोकस ऐसे चेहरों की पहचान करना है, जिनके दम पर चुनावी मैदान में जीत हासिल की जा सके. माना जा रहा है कि सर्वे के नतीजों के आधार पर पार्टी कुछ मौजूदा विधायकों के टिकट काटने का फैसला भी कर सकती है।
यूपी में बीजेपी ने तेज की चुनावी तैयारी
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं. पार्टी के स्तर पर संभावित उम्मीदवारों, विधायकों के प्रदर्शन और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों का आकलन किए जाने की चर्चा है. एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिलों का दौरा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विनोद तावड़े की सक्रियता को भी चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है. पार्टी के भीतर संभावित उम्मीदवारों को लेकर फीडबैक जुटाने की चर्चा है।
125 सीटों पर सर्वे पूरा होने की चर्चा
पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, करीब 125 विधानसभा सीटों पर सर्वे का काम पूरा होने की बात कही जा रही है. इस प्रक्रिया में संगठन के अलग-अलग स्तरों से जानकारी जुटाने पर जोर है. बताया जा रहा है कि बूथ कमेटियों, शक्ति केंद्रों और स्थानीय नेताओं से संभावित उम्मीदवारों की लोकप्रियता तथा चुनाव जीतने की क्षमता को लेकर राय ली जा रही है. इसमें यह समझने की कोशिश है कि मौजूदा विधायक के प्रति जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं का रुख कैसा है।
क्या मौजूदा विधायकों के कटेंगे टिकट?
बीजेपी की चुनावी रणनीति में उम्मीदवारों का चयन अहम भूमिका निभा सकता है. चर्चा है कि जिन विधायकों के खिलाफ क्षेत्र में नाराजगी है या जिन्हें एंटी-इनकंबेंसी का सामना करना पड़ रहा है, उनके टिकट पर पार्टी दोबारा विचार कर सकती है. सर्वे के जरिए यह जानने की कोशिश की जा रही है कि कौन-सा चेहरा आगामी चुनाव में पार्टी के लिए बेहतर परिणाम दे सकता है. यदि किसी सीट पर मौजूदा विधायक की स्थिति कमजोर पाई जाती है, तो वहां नए उम्मीदवार को मौका देने का विकल्प खुला रह सकता है।
पूर्वांचल और अवध पर विशेष नजर
2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी को अपेक्षा के अनुरूप नतीजे नहीं मिले थे. ऐसे में पूर्वांचल और अवध जैसे क्षेत्रों में पार्टी अपनी स्थिति मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे सकती है. इन क्षेत्रों में स्थानीय समीकरणों और उम्मीदवारों की स्वीकार्यता का आकलन चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है. फिलहाल, सर्वे की चर्चा के बीच यह देखना अहम होगा कि पार्टी उम्मीदवारों के चयन और संगठनात्मक बदलावों को लेकर क्या फैसला करती है. टिकट काटने या नए चेहरों को मौका देने पर अंतिम निर्णय बीजेपी का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व ही करेगा।
मोदी-शाह और नितिन नवीन के दौरों से बढ़ेगी सियासी हलचल
वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अगले एक सप्ताह में प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में सक्रिय नजर आएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के प्रस्तावित कार्यक्रमों को संगठन की चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है. दिवाली से पहले पार्टी संगठन की कमियों को दूर करने और सहयोगी दलों के साथ तालमेल मजबूत करने की रणनीति पर काम कर सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 अक्टूबर को वाराणसी पहुंचेंगे. उनके कार्यक्रम में एयर शो देखना शामिल बताया गया है. इसके बाद 27 अक्टूबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन आजमगढ़ में ओमप्रकाश राजभर के मंच पर मौजूद रहेंगे. वहीं, 30 और 31 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लखनऊ में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल होंगे।
नवंबर से बूथ स्तर तक संवाद की तैयारी
भाजपा की चुनावी रणनीति में बूथ स्तर का संगठन हमेशा अहम भूमिका निभाता रहा है. चर्चा है कि नवंबर से पार्टी बूथ अध्यक्षों, शक्ति केंद्र संयोजकों और अन्य पदाधिकारियों के साथ संवाद की प्रक्रिया तेज कर सकती है. इसका उद्देश्य संगठन की जमीनी स्थिति का आकलन करना और 2027 के चुनाव के लिए तय रणनीति को कार्यकर्ताओं तक पहुंचाना होगा. 30 और 31 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में अमित शाह के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की बात कही गई है. उत्तर प्रदेश से जुड़े राष्ट्रीय पदाधिकारी, केंद्र सरकार के मंत्री, राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और संगठन के प्रमुख चेहरे भी बैठक में मौजूद रह सकते हैं।





