प्रयागराज में फर्जी डिग्री से वकालत का आरोप, 26 अधिवक्ताओं पर दर्ज हुआ मुकदमा

प्रयागराज
प्रयागराज में फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों के सहारे अधिवक्ता के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने का मामला सामने आया है। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की तहरीर पर सिविल लाइंस थाने में 26 अधिवक्ताओं के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। वैरिफिकेशन के दौरान आरोपियों की डिग्री और अंकपत्र संबंधित विश्वविद्यालयों के रिकॉर्ड में फर्जी या गलत पाए गए थे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

सूत्रों की मानें तो यूपी बार काउंसिल की ओर से 50 से अधिवक्ताओं के खिलाफ तहरीर दी गई है। बाकि आरोपियों के खिलाफ पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने में जुटी है। बार काउंसिल का दावा है कि वैरिफिकेशन रिपोर्ट मिलने के बाद अधिवक्ताओं को वैरीफिकेशन समिति की ओर से मामले को लेकर अलग-अलग तारीखों में नोटिस भी भेजे गए थे। पुलिस एफआईआर दर्ज कर जांच में जुटी है। विवेचना में यह स्पष्ट होगा कि कथित दस्तावेज किस स्तर पर तैयार किए गए और इसमें संबंधित व्यक्तियों की क्या भूमिका रही।

बीएसएफ कांस्टेबल की बर्खास्तगी बरकरार
उधर, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीमा सुरक्षा बल के कांस्टेबल देवेंद्र मिश्रा की याचिका खारिज कर दी है। उन्होंने अपनी बर्खास्तगी और छह महीने की सश्रम कारावास की सजा को चुनौती दी थी। 10 मई 2001 को याचिकाकर्ता बीएसएफ में कांस्टेबल के पद पर तैनात थे, को उनकी प्लाटून के लांस नायक पवन कुमार ने बीओपी सावना पर ड्यूटी सौंपी थी। इसी दौरान याचिकाकर्ता ने अपनी राइफललांस नायक पर तान दी। जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद समरी कोर्ट मार्शल का आदेश हुआ। 18 मई 2001 को कोर्ट मार्शल में याचिकाकर्ता ने गुनाह कबूल कर लिया। गवाह पेश करने के को भी स्वेच्छा से ठुकरा दिया तो छह महीने का सश्रम कारावास और सेवा से बर्खास्तगी की सजा सुनाई गई

हाईकोर्ट ने विद्युतकर्मी के ट्रांसफर के आदेश पर लगाई रोक
वहीं, एक अन्य मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के कर्मचारी गुलाब के ट्रांसफर पर रोक लगा दी है और प्रबंध निदेशक वाराणसी को याची के प्रत्यावेदन पर तीन माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि तब तक 14 जुलाई, 2026 के स्थानांतरण आदेश पर रोक प्रभावी रहेगी। याची वर्तमान में टेक्नीशियन ग्रेड-2 (सब-स्टेशन ऑपरेटर) के पद पर करैलाबाग डिवीजन, करेली सर्किल-1, प्रयागराज जोन-1 में कार्यरत हैं। उन्होंने प्रबंध निदेशक, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, वाराणसी द्वारा 14 जुलाई, 2026 को पारित स्थानांतरण आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी

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