बच्चों से घर में लोकभाषा में बात करें – डॉ. किशन तिवारी

मध्यप्रदेश लेखक संघ की प्रादेशिक लोकभाषा पद्य/गद्य गोष्ठी रविवार को दुष्यंत संग्रहालय,शिवाजी नगर,भोपाल में वरिष्ठ रचनाकारों की उपस्थिति में संपन्न हुई। मुख्य अतिथि, वरिष्ठ ग़ज़लकार डॉ. किशन तिवारी ने कहा कि बच्चों से घर में लोकभाषा में बात करनी चाहिए एवं बुंदेली में सुनाया, “हो गई भौत ही जीभ चटोरी, बात सुनत नहीं मोरी” अध्यक्षीय उद्बोधन में संघ के प्रादेशिक अध्यक्ष राजेंद्र गट्टानी ने संघ की नवीन गतिविधियों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. प्रार्थना पंडित की सरस्वती वन्दना से हुई। तत्पश्चात पहले कवि के रूप में तराना से पधारे, विक्रम विवेक ने मालवी में सुनाया, “बईरा ने एस्तर आखी रात माथो फोड़ियो, जदे कई जई ने पन्ना बा ने दारु छोड़ियों”। खरगोन से पधारे छोगालाल कुमरावत ‘सुजस’,ने निमाड़ी ग़ज़ल सुनाई, “काइ खाइन फाकोज दादा? चस्मा सी खूब ताकोज दादा।” भोपाल के राजेश तिवारी ने बुंदेली में सुनाया “हड्डी जमा देय वो जाड़ो, भुनसारे आंगन में ठाड़ो, जाड़ो पर रओ भैया भारी, घर में ही है खैर तुम्हाररी” और ख़ूब वाहवाही लूटी। धामनोद से आये निर्मल शर्मा ने निमाड़ी में सुनाया, “हम दई रहिया ज कलेजा को टुकड़ों, राखजो एक संभाली न, या छे हमारा दो कुल की लाज, राखजों एक संभाली न”।
ग्वालियर से पधारी कवयित्री आशा पाण्डेय ने बुंदेली रचना में बेटियों की बिदाई का दृश्य दिखाकर माहौल मार्मिक कर दिया, “बिन्नू बिन घर हो गओ खाली, परसो लग रओ बिना नोन को, बिन बिलिअन की थाली”। भोपाल के सत्यदेव सोनी सत्य ने बघेली में सुनाया, “वेदहिं नारि बखान करैं अरु स्तुति वेद पुराणहिं गावैं, नारि रचैं रचना, जगजीवन सृष्टि अधारहिं नारि कहावैं। उज्जैन की संगीता तलेरा ने मालवी में जाड़े पर रचना सुना के ख़ूब गुदगुदाया, “कतरी ठंड पड़वा लग गी, उज्जैन में भी कुल्लू-मनाली की हवा चलवा लग गी।” भिण्ड से पधारे सुनील त्रिपाठी निराला ने बुन्देली में चौकड़िया छंद सुनाया, उनको बाप बड़ौ ना भैया, सबसे बड़ौ रुपैया। बिना घूस के वे नइं धर रए, अपईं कहूं चिरैया”। दतिया से पधारे विनोद मिश्र सुरमणि ने बुंदेली में सुनाया, “बरसा उने करें बेचैन, जिनके सूखे नैन, दादुर मोर पपीहा बिजुरी लगे हैं गारी देंन”।
मंचासीन अतिथियों में मध्यप्रदेश लेखक संघ के उपाध्यक्ष, वरिष्ठ गीतकार ऋषि श्रृंगारी ने सुनाया, “हम जानत तुम इत गरजोगे उत बरसोगे रे, ओ बदरा कित बरसोगे रे”। विशिष्ट अतिथि एवं मध्यप्रदेश लेखक संघ के संरक्षक डॉ. राम वल्लभ आचार्य ने सुनाया, “अब तो गाँव शहर में आ रओ, मोड़ा फ़िल्मी गानो गा रओ”। मुरेना से पधारे सारस्वत अतिथि कैलाश गुप्ता ‘सुमन’ ने एक बच्ची की व्यथा यूँ सुनाई, “ब्याहो जिन करियो ओ महतारी, अबे उमर है बाली” एवं सभी को भाव विभोर कर दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन संघ के प्रांतीय मंत्री मनीष बादल एवं सह मंत्री डॉ. प्रार्थना पंडित ने किया और कोषाध्यक्ष सुनील चतुर्वेदी ने अपने पिता की बुंदेली रचना के साथ धन्यवाद ज्ञापन किया।





