डॉ. अशोक व्यास की दो पुस्तकों उम्र की सीमा होती है एवं निबंध संग्रह स्वप्न भंग का अनवरत सिलसिला का हुआ लोकार्पण

मध्यप्रदेश लेखक संघ के तत्वावधान में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक व्यास की दो कृतियाँ कहानी संग्रह उम्र की सीमा होती है एवं निबंध संग्रह स्वप्न भंग का अनवरत सिलसिला का लोकार्पण कल दुष्यंत संग्रहालय, शिवाजी नगर में हुआ।
लेखक डॉ. अशोक व्यास ने अपनी पुस्तकों के बारे में बताते हुए कहा कि मैं मूलतः व्यंग्यकार हूँ परन्तु सभी बातें व्यंग्य में नहीं कही जा सकतीं कुछ बातें सीधे तौर पर कही जाती हैं, इसी का परिणाम ये दोनों पुस्तकें हैं जो कहानियों और निबंधों के रूप में सामने आयी हैं। साथ ही उन्होंने अपनी दोनों पुस्तकों से एक-एक रचना भी सुनाई। मुख्य अतिथि एवं कार्यक्रम में वरिष्ठ कथाकार मुकेश वर्मा ने पुस्तकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि लेखक नें अच्छे विषयों का चयन किया और अच्छा लिखा।
सारस्वत अतिथि, साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के निदेशक डॉ. विकास दवे ने पुस्तकों पर अपने विचार रखे। लेखक संघ के अध्यक्ष राजेन्द्र गट्टानी ने अध्यक्षयीय उद्बोधन दिया और अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। यशवंत गोरे ने निबंध संग्रह स्वप्न भंग का अनवरत सिलसिला की समीक्षा पढ़ी एवं कहानी संग्रह उम्र की सीमा होती है की समीक्षा कथाकार शीला मिश्रा ने पढ़ी।
कार्यक्रम के शुरुआत में सरस्वती वन्दना डॉ. प्रार्थना पंडित ने पढ़ा, स्वागत वक्तव्य मध्यप्रदेश लेखक संघ के प्रादेशिक उपाध्यक्ष ऋषि श्रृंगारी ने एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रादेशिक सचिव मनीष बादल ने दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन विमल भंडारी ने किया।





