21 हजार गोहत्या रोकीं:बूढ़ी गायें ले लेते हैं, ताकि स्लॉटर हाउस न जाएं

गायत्री शक्तिपीठ में पिछले 25 वर्षों से गोसेवा अभियान जारी है। एमपी नगर जोन वन और इमलिया गांव में इनकी दो गोशालाएं हैं। इस पवित्र अभियान के अंतर्गत अब तक करीब 21 हजार गोहत्या रोकने का पुण्य कार्य किया गया। अब इन गोशालाओं में चारा खिलाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है।

एमपी नगर जोन वन के समीप स्थित गायत्री शक्तिपीठ की गोशाला में रोजाना शाम 5 बजे के बाद शहर के अलग-अलग इलाकों से लोग परिवार समेत गोमाता को चारा खिलाने आते हैं। इनमें कई जज, प्रशासनिक अधिकारी, वकील, सरकारी कर्मचारी और अधिकारी शामिल हैं।

अध्यक्ष डॉ. शंकरलाल पाटीदार बताते हैं कि अरेरा हिल्स स्थित मंत्रालय, सतपुड़ा, विंध्याचल भवन, एमपी नगर जोन 1 और जोन 2 स्थित निजी कंपनियों के अधिकारी व कर्मचारी भी नियमित रूप से गोमाता को चारा खिलाने आ रहे हैं। कई परिवारों का यह क्रम निरंतर चल रहा है।

एमपी नगर स्थित मां गायत्री गोशाला में 150 गोवंश हैं। समिति के सदस्य एवं सेवक सुभाष शर्मा और ओम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि रोजाना 15 क्विंटल हरे चारे और 10 10 क्विंटल भूसे की खपत हो रही है।

किसानों को बछिया देते हैं, बूढ़ी होने पर ले लेते हैं

गोशाला के सूरज परमार ने बताया कि इमलिया गोशाला में अभी 300 गाय हैं। एमपी नगर में 155 गाय हैं। हम किसानों को बछिया देते हैं, वे उन्हें पालते हैं, इनका दूध निकालते हैं, फिर बूढ़ी होने पर गाय हमें वापस गोशाला में दे देते हैं। हम गोशाला में भी बाकायदा इन्हें पालते हैं।

पिछले दस सालों से यह योजना चल रही है। अब तक कम से कम 7000 किसानों से ऐसी 7000 गाय गोशाला में आ चुकी हैं। रायसेन या उसके आसपास से पुलिस द्वारा कभी भी कोई गायों से भरा ट्रक जब्त किया जाता है तो वह पकड़ी गई गायें हमारी गोशाला में छोड़ देते हैं। यहां हम उनकी सेवा करते हैं। पिछले एक साल में ही ऐसी 900 गाय यहां आई हैं। यदि पिछले 25 सालों का हिसाब लगाएं तो कम से कम 21 हजार गाय गोशाला में आ चुकी हैं।

गुड़-अजवाइन दलिया मिलाकर खिलाते हैं… 

गुप्ता ने बताया कि हमारे यहां सवा मणि नाम की योजना भी संचालित की जा रही है। इसके तहत दानदाता 2100 रुपए देते हैं। इसमें गुड़, अजवाइन और दलिया मिलाकर मंदिर परिसर में ही पकाया जाता है। जिसे ये दानदाता परिवार समेत गौ माता को खिलाते हैं। गुप्ता ने बताया कि वास्तु शास्त्र के अंतर्गत दोष निवारण के लिए यह किया जाता है।

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