Bhopal: पानी का न मैनेजमेंट शुरू हुआ, न ही कटौती के प्लान पर अमल

By: Praveshnew
11-02-2019 07:38

भोपाल। बड़े तालाब में इस बार पानी का जल स्तर कम होने के कारण शहर में जलसंकट होना तय है। खासकर बड़े तालाब से जुड़े सप्लाई वाले क्षेत्रों में जैसे बैरागढ़, कोहेफिजा, ईदगाह हिल्स और पुराने शहर के एरिया में ज्यादा समस्या होगी। तालाब में पानी के लेवल में कमी को देखते हुए निगम प्रशासन ने दो प्लान तैयार किए, लेकिन एक पर भी अमल नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल, जनवरी के आखिर में तत्कालीन नगरीय विकास पीएस प्रमोद अग्रवाल ने निगम के पानी सप्लाई की समीक्षा की थी। उन्होंने कहा कि पानी पर्याप्त है, इसलिए अल्टरनेट डे सप्लाई की जरूरत नहीं है। उन्होंने लीकेज सुधारने और पानी के मैनेजमेंट को सुधारने के निर्देश दिए।

इसके बाद निगम ने 28 जनवरी को शहर में सप्लाई पर 10 मिनट कटौती का प्लान बनाया। प्लान पर अमल से ठीक पहले 5 फरवरी को नगरीय विकास विभाग के मंत्री जयवर्धन सिंह ने समीक्षा बैठक बुलाई। उन्होंने भी शहर में पर्याप्त पानी देने के निर्देश दिए। इसके बाद निगम अफसर असमंजस में हैं। न तो कटौती कर पा रहा है न मैनेजमेंट हुआ।

गर्मियों में तालाब से पानी खिंचना हो जाएगा मुश्किल

वर्तमान में बड़े तालाब का जल स्तर 1656.80 फीट है। मई में तालाब डेड स्टोरेज लेवल यानी 1652 फीट तक पहुंच जाएगा। इसके बाद तालाब से पानी खींचना मुश्किल होगा। ऐसे में तालाब से होने वाली सप्लाई मुश्किल होगी। साथ ही गंदा पानी आने की समस्या होगी। ऐसे में शहर को पर्याप्त पानी देना मुश्किल होगा।

गर्मियों में यहां होगी समस्या

कोलार और नर्मदा से जुड़े क्षेत्रों में ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन तालाब से जुड़े क्षेत्रों में जलसंकट हो सकता है। खासकर बैरागढ़, ईदगाह हिल्स और कोहेफिजा क्षेत्र में। क्योंकि इन क्षेत्रों में कोलार और नर्मदा की कनेक्टिविटी नहीं है।

यह है समाधान

वर्तमान में तालाब से रोजाना 23 एमजीडी पानी लिया जा रहा है। पीएस ने निर्देश दिए थे कि तालाब से सिर्फ 15 एमजीडी पानी लिया जाए, बाकी आपूर्ति कोलार और नर्मदा से की जाए। लेकिन इस दिशा में कुछ नहीं हुआ। तालाब से रेलवे, भेल आदि भी पानी ले रहे हैं, जिसमें कटौती नहीं की जा रही है।

लीकेज को सुधारकर पानी की बर्बादी को कम की जाए, लेकिन लीकेज की समस्या बनी हुई है। जहां नई लाइनें बिछाई जा चुकी हैं वहां नए नेटवर्क के माध्यम से पानी दिया जाए। पुराने नेटवर्क बंद किया जाए। लेकिन पुराने नेटवर्क में लीकेज से पानी बर्बाद हो रहा है।
 

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