वकील पति से केस लड़ने के लिए महिला बनी वकील, ऐसे मिला हक

By: Praveshnew
11-02-2019 07:19

रायपुर। एक दौर था, जब महिलाओं को समाज में अबला और कमतर माना जाता था, लेकिन अब वे दिन गए। अब हमारे समाज की महिलाएं आत्मनिर्भता और स्वनिर्णय के बलबूते पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। यूं कहें तो महिलाए पुरुषों से कम नहीं हैं। इसका जीता-जागता उदाहरण रविवार को देखने को मिला।

राष्ट्रीय पत्रिका मितान पुलिस टाइम्स व अन्य संस्थान ने 10 ऐसी ही महिलओं को तेजस्वनी अवार्ड से सम्मान किया, जिनकी मिसाल आज पूरे प्रदेश व समाज में दी जाती है। इन्हीं में से एक हैं शोभा सोनी। जी हां, ये बताती हैं कि हमारी शादी के कुछ दिनों के बाद ससुराल वालों की तरफ से हमें दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा था। कुछ दिनों बाद एक लड़की पैदा हुई। इसके बाद भी यह सिलसिला जारी रहा।

शर्म की बात तो यह है कि हमारे पति एक वकील थे। फिर भी ऐसे कृत्य करने से बाज नहीं आए। जब हमने न्यायालय में इसकी गुहार लगाई तो उचित न्याय नहीं मिला। इसके बाद हमने अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए वकालत की पढ़ाई की और अपना केस खुद लड़ा।, इससे हमें न्याय मिला।

आज हम अपने जैसी कई महिलाओं को हक दिलाने का काम कर रही हूं। ऐसी ही कुछ कहानी है सरला यादव की। उन्होंने भी भाइयों द्वारा मां के साथ किए जा रहे अत्याचार, दुर्व्यवहार, संपत्ति हड़पने जैसे मामले में अपनी मां को हक दिलाने के लिए सिविल सर्विसेस की पढ़ाई छोड़ वकालत की पढ़ाई की और अपनी मां को हक दिलाया। ऐसी ही कई जांबाज दिलेर व खुद निर्णय लेने वाली 10 महिलाएं अपनी किस्मत व अपनी कामयाबी की गाथा खुद लिखी रही हैं।

इन्हें भी किया गया सम्मानित

महिलाएं आज निर्णय लेने के लिए खुद सक्षम हैं। स्वनिर्णय व आत्मनिर्भता से समाज को सुधार रही हैं। साथ ही अपनी कामयाबी की गाथा भी खुद गढ़ रही हैं। ऐसे ही कई महिलाएं को सम्मान दिया गया।

- संगीता धुरंधर- मानसिक दिव्यांग बच्चों के लिए स्कूल चलाती हैं। वे हमेशा निशक्तजनों को रोजगार दिलाने के लिए प्रयासरत रहती हैं।

- रीता अग्रवाल- निशक्तजनों के अधिकारों के लिए आवाज उठाती हैं और उन्हें न्याय दिलाने का काम करती है। उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए हर मुमकिन प्रयास करती हैं।

-अन्नू विश्वकर्मा- ये राष्ट्रीय स्तर की कबड्डी खिलाड़ी हैं। नवजात शिशु होने के बाद भी अपने खेल को जारी रखी और कई नेशनल खेलने के लिए खुद को काबिल बनाया।

-शांति पांडेय- इनके पति शराब पीकर प्रताड़ित करते थे। फिर कुछ दिनों बाद दूसरी शादी कर लिए। इसके बावजूद भी शांति ने नर्स की नौकरी कर अपनी पांच बेटियों को पाला, सभी को अच्छी शिक्षा दिया। आज सभी बच्चे खुशहाल जीवन जी रहे हैं।

-सबा अंजुम खान- धोखाघड़ी का शिकार हुई। इनका विवाद बड़ी उम्र व शादी शुदा व्यक्ति के साथ भ्रमित कर फंसाया गया। इसके बाद अत्याचार इस हद तक की अपने ही घर के बाहर सुलाया गया। तब से अपनी मां-पिता के घर पर रहकर अपने बच्चों को अपने खर्च पर पढ़ा रही हैं।

-जीतू जाशी- आप समाज सेवी हैं। दिव्यांगों के लिए समाज सेवा का काम करती है। उनमें हमेशा नई ऊर्जा भरने का काम करती है।

-नीलम पांडेय- आप एक गृहिणी हैं। आपने चलती ट्रेन के तीन बोगी बागते हुए चोर को पकड़ा और अपने पिता का मोबाइल वापस लाया।

-रानू घनगर- ये महिलाओं के रोजगार दिलाने का काम करती हैं। इन्होंने अभी तक कई महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करवाया। इसके साथ ही संतोषी सोनी, पूजा मोहिते, मधुलता दुबे व अनुपमा तिवारी को सम्मानित किया गया।
 

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